रायपुर, 06 सितंबर 2026 : वनवासी विकास समिति, रायपुर महानगर की ओर से शबरी कन्या आश्रम छात्रावास में भव्य रक्षाबंधन उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वनवासी संस्कृति, शिक्षा, सामाजिक एकजुटता और जनजातीय समाज के संरक्षण को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे। इस दौरान बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिकों ने जनजातीय बहनों से रक्षासूत्र बंधवाकर उनकी सुरक्षा और स्वावलंबन में सहयोग का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मध्यक्षेत्र के क्षेत्रीय संघचालक डॉ. पूर्णेन्दु सक्सेना ने कहा कि भारत की मूल भावना एक-दूसरे की मान्यताओं और परंपराओं की रक्षा करने की रही है। उन्होंने कहा कि वनवासी समाज की जीवनशैली और प्रकृति से जुड़ी संस्कृति देश की महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने धर्मांतरण के माध्यम से वनवासी समाज की सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना पर पड़ने वाले प्रभाव को गंभीर विषय बताते हुए समाज को वैचारिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
डॉ. सक्सेना ने कहा कि वनवासी समाज की व्यवस्थाओं और प्रकृति-आधारित जीवन पद्धति का संरक्षण जरूरी है। उन्होंने कहा कि यदि इन परंपराओं को बचाया नहीं गया तो प्रकृति संरक्षण की चुनौती भी बढ़ेगी। समाज के सभी वर्गों को वनवासी समाज की प्रगति में सहभागी बनने का प्रयास करना चाहिए।
प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण पर जताई चिंता
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर ने कहा कि जनजातीय क्षेत्रों में प्रलोभन के जरिए धर्मांतरण की गतिविधियों को लेकर समाज को सजग रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि परिवार व्यवस्था और प्रकृति पूजा जनजातीय समाज की बड़ी ताकत हैं। इन मूल्यों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास और दृढ़ संकल्प जरूरी है।
वनवासी बेटियों की शिक्षा को बताया अनुकरणीय
विशिष्ट अतिथि आदर्शिनी महिला मंडल की अध्यक्ष मंजुला कंवर ने शबरी कन्या आश्रम की व्यवस्थाओं और वहां दी जा रही शिक्षा-दीक्षा की सराहना की। उन्होंने कहा कि वनवासी कन्याओं को शिक्षा के साथ संस्कार देने का प्रयास अनुकरणीय है। समाज को इन बेटियों के उज्ज्वल भविष्य और सुरक्षा के लिए हरसंभव सहयोग करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वनवासी विकास समिति के महानगर अध्यक्ष रवि गोयल ने की।
पूर्वोत्तर की छात्राओं ने प्रस्तुत किया लोकनृत्य
आयोजन की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद शबरी कन्या आश्रम में निवासरत पूर्वोत्तर की छात्राओं ने समूह गीत और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किया। रंगारंग प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया और पूरा परिसर तालियों की गूंज से भर उठा।
इस अवसर पर आश्रम की छात्राओं द्वारा स्वरचित एवं हस्तलिखित पुस्तक ‘शबरी के बेर’ का विमोचन भी अतिथियों ने किया। छात्राओं के इस रचनात्मक प्रयास की उपस्थित लोगों ने सराहना की।
300 से अधिक नागरिकों ने लिया हिस्सा
रक्षाबंधन उत्सव में आश्रम की जनजातीय बहनों ने अतिथियों, डॉक्टरों, प्राध्यापकों और प्रबुद्ध नागरिकों को तिलक लगाकर उनकी कलाई पर रक्षासूत्र बांधा। इसके साथ ही उपस्थित लोगों ने बहनों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन में सहयोग का संकल्प लिया। कार्यक्रम में 300 से अधिक गणमान्य नागरिकों और विभिन्न छात्रावासों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम में माधवी जोशी, ललिता मुर्मू, रामनाथ कश्यप, डॉ. अनुराग जैन, राजीव शर्मा, कृष्ण कुमार वैष्णव, दिलीप दास, तिसेन भगत, संगीता चौबे और रेखा देशपांडे सहित बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
वंदेमातरम के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम का संचालन प्राची भगत ने किया। सिद्धी दलवी ने प्रस्तावना रखी, जबकि आश्रम का वार्षिक प्रतिवेदन अस्मिता दीदी ने प्रस्तुत किया। वनवासी विकास समिति रायपुर महानगर के सचिव प्रवीण अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। सामूहिक वंदेमातरम गान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इसके बाद उपस्थित लोगों ने सामूहिक सहभोज में हिस्सा लिया।




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