सदन में आरोप, जवाब और तंज की बरसात; भूपेश बघेल ने कराई कांग्रेस विधायकों की शक्ति परीक्षा, भाजपा ने कहा- पहले अपनी पार्टी का विश्वास तो हासिल कीजिए।
रायपुर. छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का अंतिम दिन राजनीतिक तल्खी और तीखी नोकझोंक के नाम रहा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू होते ही सदन का माहौल गर्मा गया। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने सरकार पर 136 बिंदुओं का आरोपपत्र पेश करते हुए कानून-व्यवस्था, किसानों, महिलाओं, युवाओं, बेरोजगारी और प्रशासनिक कार्यशैली सहित कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। जवाब में भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों से ज्यादा विपक्ष की अंदरूनी राजनीति को निशाने पर ले लिया।
136 सप्ताह…136 आरोप, महंत ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार 136वें सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। इसी आधार पर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ 136 बिंदुओं का आरोपपत्र तैयार किया है। उन्होंने दावा किया कि सरकार अपने अधिकांश वादों को पूरा करने में विफल रही है और प्रदेश के विभिन्न वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
भाजपा का पलटवार, कांग्रेस की एकजुटता पर ही उठा दिया सवाल
महंत के आरोपों के बीच भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि विधानसभा के इतिहास में पहली बार नेता प्रतिपक्ष स्वयं अविश्वास प्रस्ताव की शुरुआत कर रहे हैं। चंद्राकर ने कटाक्ष करते हुए कहा कि इससे लगता है कि नेता प्रतिपक्ष को अपनी ही पार्टी के विधायकों के समर्थन पर भरोसा नहीं है।
भूपेश बघेल ने कराया शक्ति प्रदर्शन, भाजपा ने फिर ली चुटकी
भाजपा के इस तंज के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपनी सीट से उठे और कांग्रेस विधायकों से हाथ उठाकर नेता प्रतिपक्ष के प्रति समर्थन जताने का आग्रह किया। विपक्ष के सभी विधायक खड़े होकर महंत के समर्थन में नजर आए। इसके बावजूद भाजपा ने हमला जारी रखा। अजय चंद्राकर ने मुस्कुराते हुए कहा कि अब तो कांग्रेस को सदन में ही अपने नेता के पक्ष में विश्वास मत लेना पड़ रहा है।
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा विधायक धरमलाल कौशिक ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस दल को अपने विधायकों का भरोसा सार्वजनिक रूप से साबित करना पड़े, वह सरकार पर अविश्वास जताने की नैतिक स्थिति में कैसे हो सकता है।
महंत ने दी सफाई, बोले- हम फैसले मिलकर लेते हैं
सदन में बढ़ती सियासी तल्खी के बीच डॉ. चरणदास महंत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि चर्चा शुरू करने से पहले उन्होंने स्वयं भूपेश बघेल से पूछा था कि पहले कौन बोलेगा। भूपेश ने उन्हें पहले बोलने की सलाह दी थी। इस पर अजय चंद्राकर ने फिर तंज कसते हुए कहा कि इसका मतलब आप हर फैसला उनसे पूछकर ही लेते हैं। जवाब में महंत ने मुस्कुराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक दल में आपसी चर्चा से निर्णय लेना कोई गलत बात नहीं है।
सदन में आरोपों से ज्यादा चर्चा रही राजनीतिक बयानबाजी की
अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के पहले ही चरण में यह साफ हो गया कि बहस केवल सरकार के कामकाज तक सीमित नहीं रहने वाली। सत्ता पक्ष और विपक्ष ने एक-दूसरे पर राजनीतिक हमले तेज कर दिए। आरोपों और जवाबों के बीच कई बार सदन में ठहाके भी गूंजे, तो कई मौकों पर माहौल बेहद तल्ख भी दिखाई दिया।
अब सभी की निगाहें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के जवाब पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के आरोपों का विस्तृत जवाब देगी और अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों को सदन में रखेगी।




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