बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने सदन में उठाया मामला, खाद्य मंत्री से मांगी जवाबदेही ; दस्तावेज दिखाने की दी चुनौती, विधानसभा अध्यक्ष ने जांच के दिए निर्देश।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को लेकर ऐसा मामला सामने आया, जिसने खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकारी राशन दुकानों में निर्धारित खाद्य सामग्री के बजाय मसालों की बिक्री कराई जा रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि यह काम विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में एक एनजीओ के माध्यम से कराया जा रहा है।
विधायक के आरोपों के बाद सदन में कुछ देर के लिए असहज स्थिति बन गई। खाद्य मंत्री दयालदास बघेल तत्काल इस पर स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। मामला बढ़ता देख विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने जांच कराने की बात कही।
सवाल पीडीएस का, खुल गया मसाले की बिक्री का मामला
प्रश्नकाल के दौरान विधायक सुशांत शुक्ला ने पूछा कि प्रदेश की राशन दुकानों में किन-किन वस्तुओं का वितरण किया जाता है। जवाब में खाद्य मंत्री ने बताया कि पीडीएस के तहत चावल, शक्कर, चना सहित शासन द्वारा निर्धारित खाद्य सामग्री वितरित की जाती है।
मंत्री का जवाब पूरा होते ही विधायक ने दावा किया कि बिलासपुर जिले के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र की कई राशन दुकानों में एनजीओ के जरिए मसाले बेचे जा रहे हैं, जबकि इसकी कोई सरकारी अनुमति नहीं है।
“मेरे पास दस्तावेज हैं, सदन में रख दूं”
सुशांत शुक्ला ने आरोप लगाया कि खाद्य विभाग के अधिकारियों के संरक्षण में राशन दुकानों के माध्यम से मसाले बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहे तो वे पूरे मामले के दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को तैयार हैं।
उन्होंने सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
मंत्री रहे निरुत्तर, अध्यक्ष ने कहा- होगी जांच
मामले पर खाद्य मंत्री तत्काल कोई ठोस जवाब नहीं दे सके। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। अध्यक्ष के आश्वासन के बाद सदन की कार्यवाही आगे बढ़ी।
सदन में जानकारी छिपाने का आरोप
विधायक ने सरकार पर सदन को अधूरी जानकारी देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राशन दुकानों के भौतिक सत्यापन में जो तथ्य सामने आए, उन्हें जवाब में शामिल नहीं किया गया। यदि गड़बड़ियां मिली हैं तो उनकी पूरी जानकारी सदन के सामने रखी जानी चाहिए।
सरकार से मांगे तीन अहम जवाब
- जनवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच बेलतरा विधानसभा की राशन दुकानों का भौतिक सत्यापन कब-कब किया गया?
- सत्यापन में किन दुकानों पर कौन-कौन सी राशन सामग्री कम पाई गई और उसकी मात्रा क्या थी?
- अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार संचालकों और अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
खाद्य विभाग पर बढ़ा दबाव
विधानसभा में मामला उठने के बाद अब खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली और पीडीएस व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो राशन दुकानों के संचालन और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है। अब सभी की नजर सरकार की प्रस्तावित जांच और उसके परिणाम पर टिकी है।




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