मुख्यमंत्री ने भूपेश सरकार के घोटालों से लेकर कांग्रेस की वादाखिलाफी तक गिनाए आरोप, बोले- आदिवासी का बेटा मुख्यमंत्री बन गया, यही कांग्रेस को सबसे ज्यादा खटक रहा है। सदन ने ध्वनिमत से खारिज किया अविश्वास प्रस्ताव।
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र का सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से सबसे अहम दिन सत्ता और विपक्ष के बीच जबरदस्त टकराव का गवाह बना। कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव करीब 15 घंटे तक चली मैराथन बहस के बाद ध्वनिमत से खारिज हो गया। देर रात तक चले इस सियासी संग्राम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के एक-एक आरोप का जवाब देते हुए कांग्रेस के पांच साल के कार्यकाल पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि जनता का विश्वास भाजपा सरकार के साथ मजबूती से खड़ा है।
“यह सरकार के खिलाफ नहीं, तीन करोड़ जनता के फैसले के खिलाफ अविश्वास”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अपने जवाब की शुरुआत ही कांग्रेस पर तीखे प्रहार से की। उन्होंने कहा कि यह अविश्वास प्रस्ताव भाजपा सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि प्रदेश की तीन करोड़ जनता के जनादेश के खिलाफ है। जनता ने विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और नगरीय निकाय चुनावों में लगातार भाजपा पर भरोसा जताया है। ऐसे में जिस दल को जनता ने विपक्ष में बैठाया है, वही अब जनता के फैसले पर सवाल उठा रहा है।
“खोखला, तथ्यहीन और राजनीतिक नौटंकी है अविश्वास प्रस्ताव”
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के प्रस्ताव को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि विपक्ष के पास सरकार के खिलाफ कोई ठोस मुद्दा नहीं है। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव राजनीतिक हताशा का परिणाम है। कांग्रेस को जनता ने नकार दिया है और अब सदन में केवल राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।
भूपेश सरकार पर घोटालों की झड़ी, सीएम ने खोला मोर्चा
मुख्यमंत्री साय ने अपने भाषण में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन की पहचान शराब घोटाला, कोयला घोटाला, डीएमएफ घोटाला, राशन घोटाला, महादेव एप घोटाला और पीएससी भर्ती विवाद जैसे मामलों से हुई। उन्होंने कहा कि सत्ता संभालते ही उनकी सरकार ने पीएससी मामले की जांच सीबीआई को सौंपकर युवाओं का विश्वास बहाल किया।
मोदी की गारंटी का रिपोर्ट कार्ड भी रखा सदन में
मुख्यमंत्री ने कहा कि ढाई वर्षों में सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी को जमीन पर उतारने का काम किया है। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, दो साल का बकाया बोनस, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, युवाओं के रोजगार, पांच नए मेडिकल कॉलेज, मुख्यमंत्री एआई मिशन और नई औद्योगिक नीति जैसी योजनाओं को उन्होंने सरकार की प्रमुख उपलब्धियां बताया।
“आदिवासी का बेटा मुख्यमंत्री बन गया, यही कांग्रेस को स्वीकार नहीं”
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण के सबसे भावनात्मक हिस्से में कांग्रेस पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक आदिवासी परिवार से आने वाले व्यक्ति का मुख्यमंत्री बनना स्वीकार नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा आदिवासियों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, जबकि भाजपा ने उन्हें नेतृत्व देने का काम किया है।
70 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा
सीएम साय ने सदन में राजनीतिक भविष्यवाणी करते हुए कहा कि अगला विधानसभा चुनाव भी भाजपा ही जीतेगी। उन्होंने दावा किया कि पार्टी 70 से अधिक सीटें जीतकर फिर सरकार बनाएगी और कांग्रेस को अगले कई वर्षों तक सत्ता में वापसी का मौका नहीं मिलेगा।
कांग्रेस पर राष्ट्रीय मुद्दों पर भी साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने केवल राज्य सरकार के कामकाज तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने धारा-370, अयोध्या में राम मंदिर, राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक संस्थाओं के मुद्दे पर भी कांग्रेस को घेरते हुए कहा कि देशहित के हर बड़े फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया। यही उसकी राजनीतिक संस्कृति बन चुकी है।
हेल्पलाइन से लेकर मुफ्त बिजली तक गिनाईं उपलब्धियां
मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076, सेवा सेतु, ई-ऑफिस, बायोमेट्रिक उपस्थिति, ऑटो म्यूटेशन, स्मार्ट रजिस्ट्री, सुघ्घर छत्तीसगढ़ अभियान, मुख्यमंत्री बिजली बिल समाधान योजना, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस कानून जैसे फैसलों ने शासन व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य निवेश, ऊर्जा, शिक्षा और उद्योग के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
सदन में सत्ता-विपक्ष के बीच दिनभर चला सियासी संग्राम
करीब 15 घंटे तक चली बहस के दौरान कई बार सदन में तीखी नोकझोंक हुई। सत्ता पक्ष ने कांग्रेस पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोप लगाए, जबकि विपक्ष ने कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक फैसलों और विभिन्न योजनाओं को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। बीच-बीच में हंगामे के कारण कार्यवाही भी प्रभावित हुई।
ध्वनिमत से गिरा अविश्वास प्रस्ताव, सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
देर रात विधानसभा अध्यक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव को ध्वनिमत के लिए रखा। सत्ता पक्ष के बहुमत के चलते प्रस्ताव खारिज हो गया। इसके साथ ही मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बहस ने आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा और कांग्रेस दोनों को अपनी-अपनी राजनीतिक लाइन स्पष्ट करने का बड़ा मंच दिया है।




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